Monday, 12 August 2013

क्यों मचाते हो चरस ?
काहे बो रहे  धान ?
क्यों करते  हो लकड़ी ?
काहे बाँटने लगते
हर बात पे अपना ज्ञान ?

हम नहीं इतने भी नादान
आगे बढ़ो और अब
हम पे कृपा करो श्रीमान …


Sunday, 11 August 2013

हम में ही कुछ कमी रही होगी
तेरी नज़र यूहीं न फिरी होगी …

कल तक तो थे तुम
हमारे  कायल कितने
खता हम से जरुर
बहुत बड़ी हुई होगी … 
शिष्ट हो
निष्ठ हो
अभीष्ट हो
उत्कृष्ट हो
बच्चे हमारे

स्वस्थ हो
मस्त हो
आश्वस्त हो
सरपरस्त हो
बुजुर्ग हमारे

सहज हो
प्रत्यक्ष  हो
उपलब्ध हो
समृद्ध हो
मित्र हमारे

धुले हो
खुले हो
मिले हो
खिले हो
दिल हमारे

विश्वसनीय हो
दर्शनीय हो
प्रशंसनीय हो
अतुलनीय हो
कर्म हमारे

सीधी हो
सपाट हो
विराट हो
विशाल हो
सोच हमारी

खुश हो
खुशहाल हो
रोशन हो
मालामाल हो
घर हमारे ….




























ग़दर क्यों मचाई तुमने
हमारे देर से घर आने पे ?
हम कभी नहीं करते मौज
काम के बहाने से …

मुद्दे और भी है,
जो वख्त लेते है
जरा यकीं तो करो
जो हम कहते है

शक करना तो तुम्हारी
फितरत में शुमार है
पर इस अंधी दौड़ की
हम पर बेतहाशा मार है

दौड़ते रहते दिन-रात
एक बेहतर कल के लिए
अपना सुकूं खो दियें  है
चंद सिक्को के लिए …







वो बेवजह नहीं काटता
तलवे नहीं चाटता
लोगो को नहीं बांटता 

सीनाजोरी नहीं करता 
अपनी शक्ति का दंभ नहीं भरता 
सत्ता के लिए नहीं मरता 

कभी झूठ नहीं बोलता 
swiss बैंक में खाता नहीं खोलता 
बिन पेंदी के लोटे की तरह नहीं डोलता 

परिवारवाद नहीं चलाता 
भ्रष्टाचार  नहीं फैलता 
संसद में नहीं चिल्लाता 

गिरगिट के जैसे रंग नहीं बदलता 
कुर्सी के लिए  नहीं मचलता 
पैसे के लिए नहीं उछलता 

खादी नहीं पहनता 
अपनी शर्म को नहीं बेचता
शत्रु समक्ष घुटने  नहीं टेकता

इसलिए इस नागपंचमी
आप सब से  अनुरोध है

नेताओ को नाग  न कहे
उनके लिए उनके कार्यकलापो  अनुसार
अन्य कोई और उपयुक्त शब्द चुने

नाग को सिर्फ नागदेवता मान
सच्चे मन से उनकी स्तुति करे …


















Friday, 9 August 2013

तेरे  तीखे तलख तेवर
मेरी मजबूर,मजलूम मुहब्बत 

संग साथ-साथ रहे
तो कैसे रहे ???
क्या क्या छोड़े ???
क्या क्या सहे  ???

तेरी तंग, तुनक मिजाज तबियत 
मेरी मस्त ,मलंग ,मनमौजी फितरत 




अहसान कौन
मानता मुल्क का
वो तो अपने इल्म के
गुरुर में जीते है

देने को और कुछ नहीं
तोहमतो के  सिवाय
इनके पास

बस अपना मतलब निकाल
रुखसत यहाँ से
ये अहसान फरामोश हो लेते है