Thursday, 3 July 2014

रफ़्तार ही तुम पे काबिज रही
फ़ासले जरूर जल्द तय हुये

मंजिल मिली न मिली ये तुम जानो
पर संगी-साथी सब छूट गए 

Tuesday, 3 June 2014

फुर्सत मिले तो कुछ सुने
अपने दिल की भी
मुद्दते हुई खुद से बात किये

बस पूरी ही करते रहे
औरो की हर फ़रमाईश
मुद्दते हुई खुद का हाल लिए

हर रोज की बेरौनक जिंदगी
चिढ़ा के कहती है हमें
मुद्दते हुई  कुछ फसाद किये

आ इससे पहले के
निबट जाए हम-तुम यूँही 
मुद्दते हुई मैखाने में मुलाकात किये 

Friday, 9 May 2014

दुश्मनों  की नफरत मशहूर कर गयी
आदमी तो हम बड़े मामूली है 

Thursday, 3 April 2014

खुले दरवाजे  पे
खटखटाते हो
कितना तकल्लुफ
हमेशा दिखाते हो

अमां घुस भी जाओ बेधड़क
हम भी बैठे है पूरा मैकदा साथ लेकर



Friday, 28 March 2014

उठो लाल अब आँखे खोलो / द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी


उठो लाल अब आँखे खोलो 
पानी लाई हूँ मुँह धो लो

बीती रात कमल दल फूले 
उनके ऊपर भंवरे डोले 

चिड़िया चहक उठी पेड़ पर 
बहने लगी हवा अति सुंदर 

नभ में न्यारी लाली छाई 
धरती ने प्यारी छवि पाई 

भोर हुआ सूरज उग आया 
जल में पड़ी सुनहरी छाया 

ऐसा सुंदर समय न खोओ 
मेरे प्यारे अब मत सोओ

Thursday, 27 March 2014

हम में अधिकतर  लोग किसी भी राजनैतिक दल के कार्यकर्ता नहीं है पर अपने विवेकानुसार हम भाजपा , आप , कांग्रेस आदि दलो  पर अपना विश्वास जरुर रखते है। देश के लोकतंत्र की सेहत के लिए शुभ संकेत है कि हम जैसा माध्यमवर्ग जो प्राय: पिछले चुनावो तक तटस्थ या उदासीन था इस बार बढ़ -चढ़कर सोशल मीडिया के माध्यम से  अपने विचार व्यक्त कर रहा है..... क्रियाये -प्रतिक्रियाये  जारी रखे  .… हाँ सबसे जरुरी बात इस बार वोट अवश्य डाले।

Sunday, 2 February 2014

इजाज़त हो तो चले 
कुछ जरुरी काम भी करे 
बहुत हुई जी हजूरी तुम्हारी 
अब अपनी भी सुध ले ....