Friday, 18 July 2014

दिल की सुनी और सरताज  हो गए
दिमाग ने तो बस गुलाम बनाये रखा 
ये जो मसले है तेरे मेरे दरमियान
अपने अपने  गुरुर के सिवा  कुछ और नहीं 

Friday, 4 July 2014

उनसे इमदाद की ख्वाईश  न करो 
इश्क़ में रियायत की गुंजाईश नहीं 

Thursday, 3 July 2014

रफ़्तार ही तुम पे काबिज रही
फ़ासले जरूर जल्द तय हुये

मंजिल मिली न मिली ये तुम जानो
पर संगी-साथी सब छूट गए 

Tuesday, 3 June 2014

फुर्सत मिले तो कुछ सुने
अपने दिल की भी
मुद्दते हुई खुद से बात किये

बस पूरी ही करते रहे
औरो की हर फ़रमाईश
मुद्दते हुई खुद का हाल लिए

हर रोज की बेरौनक जिंदगी
चिढ़ा के कहती है हमें
मुद्दते हुई  कुछ फसाद किये

आ इससे पहले के
निबट जाए हम-तुम यूँही 
मुद्दते हुई मैखाने में मुलाकात किये 

Friday, 9 May 2014

दुश्मनों  की नफरत मशहूर कर गयी
आदमी तो हम बड़े मामूली है 

Thursday, 3 April 2014

खुले दरवाजे  पे
खटखटाते हो
कितना तकल्लुफ
हमेशा दिखाते हो

अमां घुस भी जाओ बेधड़क
हम भी बैठे है पूरा मैकदा साथ लेकर