Tuesday, 31 December 2013

वक्त फिर से बे-वफाई कर गया
देखो कितनी जल्दी फिर से साल बदल गया

कुछ मिला तो कुछ रह गया अधूरा
जिंदगी है चलता रहेगा ये सिलसिला

फुर्सत निकालिए
अपनों के और करीब आते रहिये

साल तो आते-जाते रहेंगे
किसी न किसी बहाने
खुशियाँ मनाते रहिये ....


Monday, 11 November 2013

उन्हें हमारे शौक से  शिकवा
हम उनकी बेजा फिक्र से नाराज 
हम  कभी-कभार  शौकिया  मैपरस्त
उनके हमेशा  उखड़े -उखड़े अंदाज़
-------------------------------------
मैपरस्त=शराबी







Saturday, 9 November 2013

हर रोज झाड़ा, पटका ,धोया और रगड़ दिया
पति था कपड़ा नहीं , तभी इतने साल चल गया

Friday, 8 November 2013

अपनी बस यही हालत है.

तुम्हे पाने के ख्वाब कैसे देखे ?
अपनी तो नींद ही नदारद है
तुम से मिलने के बाद
अपनी बस  यही हालत है.…


Thursday, 7 November 2013

झाड़ पे ऊँचा चढ़ा  गए
उनसे आशिकी के  ख्वाब दिखा गए 
दोस्त साले कमीने थे
बस सुपुर्द-ए -खाक करवा गए

Thursday, 31 October 2013

कुछ तो किया जाये

कुछ तो किया जाये
फुर्सत है चलो पिया जाये
तरबतर होकर इस मैकदे में
खुदी छोड़ , फ़क़ीर हुआ जाये 

दुःखती रग दबा गए

दुःखती रग दबा गए 
सामने आये और तड़पा  गए 
ग़लतफ़हमी थी के भूल बैठे है उन्हें 
हमें बस आइना दिखा गए