Wednesday, 6 August 2014

चाचा चौधरी और राका
चाचा चौधरी और राका की वापसी
चाचा चौधरी अमेरिका में
चाचा चौधरी और रहस्यमय  चोर
चाचा चौधरी अमेरिका मैं
चाचा चौधरी और साबू का हथौड़ा
चाचा चौधरी और उड़ने वाली कार
पिंकी और झपट जी की पतंग
पिंकी और दादा जी का अखबार
पिंकी और साबुन के बुलबुले
बिल्लू का हंगामा
बिल्लू और बजरंगी पहलवान
बिल्लू  पिकनिक पर ....  आदि और न  कितनी कॉमिक्स के नाम आज भी याद है , बीनी ,साबू , टिंगू मास्टर ,गब्दू ,गोबर सिंह और न जाने कितने किरदार   बचपन की उन सुनहरी यादो के बीच  आज भी जिन्दा है.…
किराये पे कॉमिक्स लाना और आपस में बदल-बदल कर पढ़ना मानो कल की ही बात है

हमारे बचपन में  खुशियां बिखेरने वाले  इन सब के जनक कार्टूनिस्ट  प्राण आज नहीं रहे.…ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और श्रद्धांजलि स्वरुप उनकी एक कृति अपने बच्चो के साथ आज जरूर पढ़े  

Sunday, 3 August 2014

आज हर दिल अजीज अपने किशोर दा का जन्मदिन है , एक फनकार की हैसियत से गजब की शख्सियत थे वो.… मस्ती, संजीदगी और रूमानीपन वाला उनका गायन गज़ब का था और उपर से उनकी उत्कृष्ट अदाकारी सोने पे सुहागा होने का अहसास कराती थी.…वाकई हरफनमौला थे वो

कुछ लोग किशोर दा ,रफ़ी साहब और मन्ना डे  में  तुलना करने बैठ जाते जो मुझे काफी ज़ाया लगती है , ये तीनो ही बेहतरीन है और कोई भी नबर २ या ३ नहीं

विरले कलाकार होते है जो हर किसी  को अज़ीज होते है.… हमारे पिताजी लोगो की पीढ़ी ने उन्हें सराहा , हम लोग उनके फैन है और हमारे बाद की भी जनरेशन उन्हें प्यार करती है.…  यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और हर गुसलखाने से आवाज आती ही रहेगी  मेरे सामने वाली खिड़की में एक चाँद का टुकड़ा रहता है.…

मेरे पसंदीदा किशोर दा के दस नग़मे

1. http://youtu.be/UULb2pAmz_A
2 http://youtu.be/jVWkTXOPS_0
3.http://youtu.be/ZYhkoq62Vxg
4 http://youtu.be/fUtXdIRvwNo
5.http://youtu.be/Foss-Vs54gk
6.http://youtu.be/IKbakQnafdA
7.http://youtu.be/SRY4oEWaYsk
8.http://youtu.be/Yi_1lqWG1Hk
9.http://youtu.be/Fr-r5NAhOZo
10http://youtu.be/6GDG7E1fUkU

Saturday, 2 August 2014

ये जश्न-ए- आज़ादी है
हर रोज मनाइये
किसी भी तारीख के पाबंध
हम तुम क्यों रहे.… :)

Friday, 1 August 2014

एक ज़माना हुआ करता था, रेडियो में short-wave पर किसी लौ की तरह फाड़-फड़ाती ,ऊपर नीची होती ध्वनि पर हम BBC हिंदी सेवा के समाचार सुना करते थे , प्रस्तुति बहुत आकर्षक होती थी , उत्कृष्ट हिंदी के शब्दों के चुनाव के साथ , वक्ताओं की कर्णप्रिय ध्वनि वाकई समाचार सुनने में एक सुखद अहसास प्रदान करती थी.… 
खबर विश्वशनीय  मानी जाती थी.… ईरान-ईराक खाड़ी युद्ध , operation ब्लू स्टार ,  बाबरी मस्जिद अादि  और न जाने  कितनी महत्वपूर्ण  घटनाओ के समय  सही खबर की ख़ोज में असंख्य  भारतीयों ने टीवी होते हुए भी रेडियो की  ओर रुख किया क्योंकि उस समय दूरदर्शन का ज़माना था ,खबरे सरकारी नियंत्रण में थी.।  

फिर ज़माना आया बाज़ारवाद का याने केबल टीवी का....हर दिन कुकुरमुत्ते के तरह उगते समाचार चैनेल ,गला  काट प्रतिस्पर्धा के बीच  वो ही चिल्ल-पौ मचाने लगे जो अपने-अपने हितो साधने में इनके आकाओ को उचित लगा, खबर का केवल मुलम्मा ही चढ़ा रहा , खेल कुछ और ही होता रहा.… पत्रकारिता किसी हिंदी फिल्म के item सांग सरीखी नज़र आने लगे , जिसमे तड़क भड़क का तड़का था.… असलियत से कोसो दूर 

इसी दौरान विद्व्ता की अपनी ढोल पीटते कुछ चेहरे उजागर हुए जो घर के चूल्हे पे चढ़े पतीले से लेकर अंतरिक्षयान प्रक्षेपण पर अपनी बे-सिर पैर की राय से हमें  प्रताड़ित करने लगे.… 

और अब समय है इंटरनेट क्रान्ति का , सोशल मीडिया ने  जब इस तथाकथित मीडिया की पुंगी बजानी शुरू की तब से इनमें खलबली मची हुई.… आम आदमी को एक सशक्त माध्यम मिला है जिसमे उसने अपनी भड़ास निकलनी आरम्भ कर दी है (जैसा की मै कर रहा हूँ ) .... 

समय रहते सचेत होने से दुर्घटना से बचा जा सकता है.… अभी तो जनता के गुस्से के केंद्र बिंदु सियासत है अगर ये न्यूज़ ट्रेडर्स नहीं सुधरे तो इनको भी हमारे कोप का भाजन बनने में ज्यादा समय नहीं लगेगा

Wednesday, 30 July 2014

प्राय: ही हम लोग ,अपने माँ -बाप या अन्य बुजुर्गो के लिए कुछ सामान  लेते समय उनकी उम्र को एक पैमाना मानकर  कटौतियाँ कर देते है.… अरे ये ही  ठीक लग रहा है ,अब इतना HI-FI  लेकर वो इस उम्र में क्या करेंगे ? और वे लोग हर बार.… अरे इसकी क्या जरुरत थी..... काम तो चल ही रहा था, तुमने बेकार में ही पैसे खर्च किये कह कर उसे सहर्ष स्वीकार कर लेते है.…
याद रहे आप आज जिस भी मुकाम पे मौजूद है यह उनकी उन कटौतियों के फलस्वरूप है जो उन्होंने जीवनपर्यन्त अपने में की है और आज भी कर रहे है.। 

माँ-बाप हमेशा साथ नहीं रहने वाले , इसलिए सर्वोत्तम पे पहला हक़ उनका है ,अगली बार बुजुर्गो के लिए कुछ खरीदते समय इस बात का ध्यान रखे 

Friday, 25 July 2014

अपने दिल में एक दूसरे की 
बातो के लिए काम जगह है 
रिश्तों में बढ़ती तल्ख़ी की 
शायद ये ही वजह है  

Saturday, 19 July 2014

उड़ा दी है मैकदे की छत
हमने इस बरसात में
तन और मन दोनों से ही
तरबतर  होने का  इंतेज़ाम है